कविता का सारांश कविता ‘हाथी चल्लम चल्लम’ के रचयिता श्रीप्रसाद हैं। इस कविता में कवि ने एक हौदे में बैठकर बच्चों द्वारा की गई हाथी की सवारी का वर्णन किया है। बच्चे एक हौदे में बैठकर हाथी पर सवार होकर खूब मज़े कर रहे हैं। […]
कहानी का सारांश हलीम नाम के एक लड़के को एक दिन चाँद पर जाने की इच्छा हुई। वह एक रॉकेट के कारखाने में बैठ गया। उसने एक रॉकेट लिया और रॉकेट पर बैठकर चाँद की तरफ़ चल पड़ा। रास्ते में चलते-चलते अँधेरा हो गया। अब […]
कविता का सारांश प्रस्तुत कविता ‘भगदड़’ के कवि पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं। इस कविता में उन्होंने घर के जीव-जंतुओं से परेशान साठ वर्ष की एक बुढ़िया का वर्णन किया है। कवि कहता है कि बुढिया चक्की चला रही थी, तभी दोने में रखी मिठाई पर […]
कविता का सारांश ‘चार चने’ कविता के रचयिता निरंकारदेव सेवक हैं। इस कविता में कवि ने यह बताया है कि यदि उसके पास पैसे होते तो वह क्या करता। कवि कहता है कि यदि उसके पास पैसे होते तो वह चार चने लाता। उनमें से […]
कविता का सारांश ‘छोटी का कमाल’ कविता के कवि सफ़दर हाश्मी हैं। इस कविता में उन्होंने एक मोटे लड़के और एक पतली लड़की का बड़े ही चुटीले शब्दों में वर्णन किया है। कवि कहता है कि समरसिंह नामक एक लड़का अपने मोटापे पर बहुत घमंड […]
कविता का सारांश ‘चकई के चकदुम’ कविता के रचयिता रमेश तैलंग हैं। इस कविता के माध्यम से कवि ने ग्रामीण परिवेश का चित्रण बड़े ही सुंदर और सहज शब्दों में किया है। कवि बच्चों से कहता है कि आओ, हम तुम मिलकर गाँव में बनी […]
कहानी का सारांश एक मुर्गी के दो चूजे थे। एक का नाम लालू और दूसरे का नाम था पीलू। लालू लाल चीजें तथा पीलू पीली चीजें खाता था। एक दिन लालू ने पौधे पर लाल-लाल कोई चीज देखी और उसे खा लिया। वह लाल मिर्च […]
कहानी का सारांश एक अंडे में से बत्तख का एक बच्चा निकला। उसने निकलकर कहा कि मैं बाहर आ गया। एक और अंडे में से मुर्गी का चूजा निकला। बाहर निकलकर उसने भी कहा कि मैं भी आ गया। अब बत्तख का बच्चा घूमने के […]
कविता का सारांश कविता ‘एक बुढ़िया’ के रचयिता निरंकारदेव ‘सेवक’ हैं। इस कविता में कवि ने एक ऐसी बुढ़िया के बारे में बताया है, जिसके पास कोई काम न था। वह दिनभर खाली रहती और कोई काम नहीं करती थी। काम रहने के कारण वह […]
कविता का सारांश ‘बंदर गया खेत में भाग’ कविता के रचयिता सत्यप्रकाश कुलश्रेष्ठ हैं। इस कविता में उन्होंने एक बंदर के क्रियाकलापों का बड़े ही रोचक ढंग से वर्णन किया है। एक बंदर एक साग के खेत में गया और ढेर सारा साग तोड़ा। फिर […]
कहानी का सारांश प्रस्तुत कहानी गेंद और बल्ले की है। गेंद ने बल्ले से कहा कि तुम मुझे क्यों मारते हो? बल्ले ने उत्तर दिया कि यदि मैं तुम्हें मारूंगा नहीं तो खेल कैसे होगा? फिर जब गेंद बल्ले के पास आई तो उसने जोर […]
कविता का सारांश ‘पतंग’ कविता सोहनलाल द्विवेदी द्वारा लिखी गई है। इस कविता में कवि ने पतंग के गुणों को बताया है। कवि कहता है कि पतंग आसमान में सर-सर सर-सर, फर-फर फर-फर करके उड़ती है। एक पतंग दूसरी पतंग को काटती हुई आकाश में […]
कविता का सारांश ‘पगड़ी’ एक बड़ी रोचक कविता है, जिसके रचनाकार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं। इस कविता में विचित्र स्थितियों का सामना करती एक पगड़ी का वर्णन किया गया है। कवि कह रहा है कि एक पगड़ी को रगड़-रगड़कर इतना साफ़ किया गया कि मैल तो […]
कहानी का सारांश एक बंदर पेड़ पर बैठा था। उसकी पूँछ काफ़ी लंबी थी और जमीन तक लटक रही थी। एक गिलहरी ने बंदर की पूँछ को देखा। उसने सोचा कि यह कोई झूला है। वह उस पर चढ़कर झूलने लगी। बंदर को गुदगुदी होने […]
कविता का सारांश ‘चूहो। म्याऊँ सो रही है’ नामक इस कविता के रचयिता धर्मपाल शास्त्री हैं। इस कविता में कवि ने एक दिन बिल्ली मौसी के सो जाने पर चूहों को स्वच्छंदतापूर्वक मनमानी करने हेतु ललकारा है। इस कविता में कवि कह रहे हैं कि […]